pyaj-ki-kheti-kaise-karen-onion-farming
|

प्याज की खेती कैसे करें | pyaj ki kheti kaise karen | Onion Farming

प्याज की खेती कैसे करें महाराष्ट्र प्याज ( Onion Farming ) का सबसे बड़ा उत्पादन करने वाला प्रदेश है. इसके बाद नंबर आता है मध्य प्रदेश का. यहां देश का करीब 40 फीसदी प्याज उत्पादन करता है . महाराष्ट्र में प्याज की तीन फसलें ली जाती हैं. अर्ली खरीफ, खरीफ और रबी सीजन की.

महाराष्ट्र के नासिक, पुणे, सोलापुर, जलगांव, धुले, उस्मानाबाद, औरंगाबाद, बीड, अहमदनगर और सतारा की प्याज प्रसिद्ध है. जबकि मध्य प्रदेश के इंदौर, शाजापुर, खंडवा, उज्जैन, देवास, रतलाम, शिवपुरी, आगर-मालवा, राजगढ़, धार, खरगोन, छिंदवाड़ा और सागर हैं. चूंकि मध्य प्रदेश में पैदा होनी वाली प्याज का प्रमुख हिस्सा वर्तमान जल-जमाव के लिए और भविष्य में बदलते जलवायु परिदृश्य के लिए दृढ़ता से उजागर माना जाता है.

प्याज की खेती, किसान हो जाएंगे मालामाल : Onion Farming

कब कौन सी फसल होती है Onion Farming

ज्यादातर इलाकों के किसानों ने प्याज की बुलाई कर ली होगी, और कई जगहों पर इसकी तैयारी हो रही है. रबी सीजन के प्याज की बुवाई अक्टूबर-नवंबर के महीने में शुरू हो जाती है और यह जनवरी तक चलती है. रबी सीजन में लगाया गए प्याज की फसल तैयार होने में चार महीने का समय लेती है. फरवरी और मार्च के बीच प्याज खोदने का काम शुरू हो जाता है. हालांकि कुछ हिस्सों में रबी सीजन की प्याज बुवाई के अनुसार अप्रैल मई तक निकलती है.

जबकि अर्ली खरीफ की बुवाई जून-जुलाई में होती है जोकि नवंबर तक आ जाती है. खरीफ सीजन के प्याज की बुवाई अगस्त और सितंबर में करते हैं, जो दिसंबर और जनवरी के बीच आ जाती है. लेकिन इन दोनों की स्टोरेज नहीं हो पाती. स्टोरेज सिर्फ रबी सीजन के प्याज किया जाता है. महाराष्ट्र के कुल प्याज उत्पादन का 65 फीसदी रबी सीजन में ही होता है. कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश का भी है. यहां भी इसी सीजन में प्याज उत्पादन होता है.

प्याज की खेती के लिए कैसा हो मौसम Onion Farming


रबी सीजन की प्याज की बुवाई का यह बिलकुल मुफीद वक्त है. नवंबर तक बुवाई हो जानी चाहिए. प्याज रोपाई के बाद 1 से 2 महीने बाद मौसम ठंडा हो जाता है. प्याज़ खिलने के दौरान तापमान में वृद्धि इसकी फसल के लिए अनुकूल मानी जाती है.

किस तरह की मिट्टी होनी चाहिए Onion Farming


हालांकि प्याज की खेती के लिए मिट्टी प्रदेश के हिसाब से अलग-अलग होती है. लेकिन इसकी अच्छी फसल और जल निकासी के लिए दोमट मिट्टी (काली मिट्टी) और जैविक उर्वरकों से भरपूर मध्यम से दोमट मिट्टी में होती है. इस मिट्टी में प्रति हेक्टेयर 40 से 50 टन देसी खाद डालने से पैदावार अत्यधिक होती है.

लहसुन की खेती से कैसे कमा सकते हैं मुनाफा, अच्छी फसल के लिए कौन-सी किस्में लगाएं?

प्याज की कौन सी किस्में हैं अच्छी Onion Farming


हालांकि प्याज पैदावार पूरी से तरह मिट्टी और खाद पर निर्भर करती है. हालांकि प्याज की दो किस्में महाराष्ट्र में ज्यादा उगाई जाती हैं. इसमें बसवंत 780 और N-2-4-1 हैं.
एग्री फाउंड डार्क रेड: यह किस्म भारत में सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है. इसके शल्क कन्द गोलाकार, 4-6 सेमी. आकार वाले, परिपक्वता अवधि 95-110, औसत उपज 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर. यह किस्म खरीफ प्याज (वर्षात की प्याज ) उगाने के लिए बेहतरीन मानी जाती है.

एन-53: भारत के सभी क्षेत्रों में उगाई जा सकती है, इसकी परिपक्वता अवधि 140 दिन, औसत उपज 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, इसे खरीफ प्याज (वर्षातकी प्याज) उगाने के लिए अच्छी मानी जाती है.

अफीम की खेती कहां-कहां होती है, इसके लिए क्यों लेना पड़ता है सरकारी लाइसेंस, कौन कर सकता है खेती?

भीमा सुपर: यह किस्म भी खरीफ एवं पिछेती खरीफ के लिये उपयुक्त है. यह किस्म 110-115 दिन में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 250-300 क्विंटल तक उपज देती है.

बसवंत 780: यह किस्म खरीफ और रबी मौसम के लिए उपयुक्त है और इसका रंग गहरा लाल है. महीने के मध्य में प्याज आकार में बड़े होते हैं. इस किस्म की पौध 100 से 120 दिनों में काटी जाती है. प्रति हेक्टेयर उपज 250 से 300 क्विंटल हैं.

N-2-4-1: यह किस्म रबी के मौसम के लिए उपयुक्त है और इसका रंग केसर है. प्याज आकार में मध्यम गोल होता है और भंडारण में बहुत अच्छी तरह रहता है. यह किस्म 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है. प्रति हेक्टेयर उपज 300 से 350 क्विंटल है. 10 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है.

कब करें जुताई Onion Farming


प्याज के सफल उत्पादन में भूमि की तैयारी का विशेष महत्व हैं. खेत की प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए. इसके उपरान्त 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या हैरा से करें, प्रत्येक जुताई के पश्चात् पाटा अवश्य लगाऐं जिससे नमी सुरक्षित रहे तथा साथ ही मिट्टी भुर-भुरी हो जाए. भूमि को सतह से 15 से.मी. उंचाई पर 1.2 मीटर चैड़ी पट्टी पर रोपाई की जाती है अतः खेत को रेज्ड-बेड सिस्टम से तैयार किया जाना चाहिए.

कौन से खाद का इस्तेमाल करें Onion Farming


प्याज की फसल को अधिक मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. प्याज की फसल में खाद एवं उर्वरक का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना चाहिए. गोबर की सड़ी खाद 20-25 टन/हेक्टेयर रोपाई से एक-दो माह पूर्व खेत में डालना चाहिए. इसके अतिरिक्त नत्रजन 100 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर, स्फुर 50 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर तथा पोटाश 50 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें. इसके अतिरिक्त सल्फर 25 कि.ग्रा.एवं जिंक 5 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर प्याज की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक होते हैं.

कितना बीज प्रति हेक्टेयर लगेगा


खरीफ मौसम के लिए 15-20 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है.

बुवाई और रोपाई का समय


खरीफ मौसम हेतु पौधशाला शैय्या पर बीजों की पंक्तियों में बुवाई नवंबर तक कर देना चाहिए, जब पौध 45 दिन की हो जाएं तो उसकी रोपाई कर देना उत्तम माना जाता हैं. पौध की रोपाई कूड़ शैय्या पद्धिति से तैयार खेतों पर करना चाहिए, इसमें 1.2 मीटर चौड़ी शैय्या एवं लगभग 30 सेमी चौड़ी नाली तैयार की जाती हैं.

खरपतवार का सफाया कैसे करें?


फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिए कुल 3 से 4 निराई-गुडाई की आवश्यकता होती है। प्याज के पौधे एक-दूसरे के नजदीक लगाये जाते है तथा इनकी जडे भी उथली रहती है अतः खरपतवार नष्ट करने के लिए रासायनिक पदार्थो का उपयोग किया जाना उचित होता है। इसके लिए पैन्डीमैथेलिन 2.5 से 3.5 लीटर/हेक्टेयर अथवा ऑक्सीफ्लोरोफेन 600-1000 मिली/हेक्टेयर खरपतवार नाशक पौध की रोपाई के 3 दिन पश्चात 750 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना बहुत प्रभावी और उपयुक्त पाये गये हैं.

सिंचाई एवं जल निकास


खरीफ मौसम की फसल में रोपण के तुरन्त बाद सिंचाई करना चाहिए अन्यथा सिंचाई में देरी से पौधे मरने की संभावना बढ़ जाती है. खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली प्याज की फसल को जब मानसून चला जाता है. उस समय सिंचाईयां आवश्यकतानुसार करना चाहिए.

कंदों की खुदाई


खरीफ प्याज की फसल लगभग 5 माह में जनवरी-फरवरी या फिर मार्च-अप्रैल माह में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है. जैसे ही प्याज की गांठ अपना पूरा आकर ले लेती है और पत्तियां सूखने लगे तो लगभग 10-15 दिन पूर्व सिंचाई बंद कर देना चाहिए और प्याज के पौधों के शीर्ष को पैर की मदद से कुचल देना चाहिए. इससे कंद ठोस हो जाते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है. इसके बाद कंदों को खोदकर खेत में ही कतारों में ही रखकर सुखाएं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *